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रविवार, 31 जनवरी 2021

अच्छी वाणी बोलने के लाभ एवं तरीके

आज हम जानते है अच्छी वाणी बोलने के क्या लाभ होते है और किस प्रकार से बोलनी चाहिए ताकि इसके फायदे हमे अपने जीवन मे मिल सकें। जैसे कि संत कबीर कहते है, "ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे आप भी शीतल होय"।                        

             वाणी अच्छी या बुरी यह कई चीजों पर निर्भर करती है। मनुष्य का मन अगर अच्छा और सकारात्मक सोचे तो वाणी भी शुद्ध निकलती है। मन मे द्वेष ईर्ष्या जैसी भावना हो तो वाणी भी अशुद्ध हो जाती है। साथ ही वाणी के खराब होने का एक और पहलू यह भी देखा जाता है कि मन मे दबी भावनाओ को बाहर न लाने के कारण व्यक्ति की मानसिकता बदल जाती है। जज्बात दिल मे दबे रह जाते है किसी ऐसे व्यक्ति का अभाव सा महसूस होने लगता है जो उसके बातो को समझे वरना यही मानसिकता उसकी वाणी को बहुत प्रभावित करती है। सामने वाला व्यक्ति किस प्रकार बात करता है इसपर भी वाणी की कठोरता निर्भर करती है। यही पर वाणी का प्रयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है।
किस प्रकार हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित करके अपनी वाणी से लोगों को प्रभावित करते है उनके साथ एक अच्छा रिश्ता कायम कर पाते है।
         तो चलिए सबसे पहले जानते है इसके लाभ किस प्रकार हो सकते हैं।
व्यक्तिमत्व की पहचान: 
मनुष्य की वाणी ही व्यक्तिमत्व की पहली झलक दर्शाती है।उसके बात करने का तरीका किसके साथ कैसा है , अलग अलग परिस्थितियों में वह कैसे बात करता है, किसी विषय पर किस तरह अपनी राय रखता है, किसतरह के शब्दों का चयन करता है जिससे उसका काम भी बन जाये और सामनेवाला संतुष्ट रहे। यह सभी चीजें व्यक्तिमत्व की पहचान बन जाती है। एक बेहतर जीवन जीने के लिये हमारा व्यक्तिमत्व आकर्षक बनाना जरूरी है जिसमे अहम वक्तृत्व कला है। अच्छी वाणी हो तो वो हमारी पहचान बन ही जाता है।


कॅरिअर का केंद्रबिंदु:
आज के दौर में इंसान को कुछ अये न आये फिर भी बोलनेमे जो व्यक्ति माहिर है उसका आधा काम तो यू ही बन गया समझो। कहते है न बोलने वाले का तो मिटटी भी बिक जाता । कॅरिअर मे सफलता पाने के लिए कम्युनिकेशन स्किल का बेहद महत्व है। इसके लिए विशेष रूप से अलग से भी ट्रेनिंग दी जाती है ताकि लोगो को बोलने की कला सिखाई जा सके। इसीसे हम समझ सकते है अच्छी वाणी कैरियर के केंद्रबिंदु साबित हो सकती है।

रिश्तों की मिठास:
रिश्तो में कड़वाहट आने का एकमात्र कारण शब्दो का गलत चयन ही होता है जो रिश्तो की डोर को कमजोर बना देता है। अक्सर विषम परिस्थितियों में इंसान अपना नियंत्रण खो देता है या कुछ देर उस परिस्थिति को समझ नही पाता और अपनी वाणी से रिश्तो में खटास ले आता है। यहाँ बेहद जरूरी है कम से कम बातो से ही रिश्तो में सुधार लाने की कोशिश करें। कभी कभी व्यक्ति के मन कड़वाहट आ भी जाये तब भी उसकी मीठी बोली रिश्तों में मिठास भर देती हैं।

नई दुनिया से परिचय:
दुनिया मे अनगिनत भाषायें बोली जाती है सबको समझना मुमकिन नही फिर भी प्यार एवं सलीके से बोली गयी बाते भी समज में आई ही जाती है। ऐसेही जब हम किसी नई जगह जाते है नए लोगों से मिलते है तो हम अपनी वाणी अपनी बोली के जरिये अपना पहला परिचय देते है। अपने आस पास के अनजान लोगों से भी आसानी से जुड़ जाते है।

आत्मविश्वास का संज्ञान:
हमारे बोलने की कला से हमें अपने आत्मविश्वास का पता चलता है। कहते है जिसकी जुबा बोलते वक्त काँपती है उसमे आत्मविश्वास की कमी होती है वही आत्मविश्वास से भरा व्यक्ति निरंतर अपने बोली से अपने वचनों से जीवनमे आगे बढ़ता जाता है। हमारी वाणी हमे इस बात का संज्ञान यानी सही ज्ञान कराती है। मंच पर बोलने वाला वक्ता अगर बोलने में निपुण न हो तो भरी सभा मे कोई उसे सुनना नही चाहेगा। अच्छी वाणी से हममें आत्मविश्वास के साथ अच्छाई का भी संचार होता है।

सकारात्मकता की ओर कदम:
जब हम अपनी वाणी से लोगो का दिल जीतते है घर परिवार में खुशियां भरते तब हम सकारात्मक सोचने लगते है क्योंकि हमारे आस पास खुशहाली और अच्छा माहौल है। जिससे हम नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मकता की ओर बढ जाते है।

            आइए अब जानते है अच्छी वाणी के इतने अच्छे लाभ प्राप्त करने के तरीकों के बारे मे और कैसे हम अपने वाणी को और भी अच्छा बना सकते है।

सबसे पहले शब्दो का सही चुनाव करना । बोलते वक़्त शब्दों का सही चुनाव काफी प्रभावशाली साबित होता है। जैसे अपने सेे बड़े व्यक्तिओ के साथ कृतज्ञता प्रकट करने वाले शब्द, घर में प्यार भरे शब्द, काम की जगह विनम्रता और चतुुुर लोगो से चतुराई भरे शब्दो का प्रयोग असर कर जाता  हैै।

स्पष्ट एवं सरलभाषा का प्रयोग करें। इससे गलतफहमियांं नही होती साथ ही सामने वाले व्यक्ति को सही तरीके से बातें समज आती है। बोलते समय आपकी  आवाज़  कापनी नही  चाहिए। सरलता से अपनी बात  करना चाहिए।

 बोलने की टोन पर ध्यान देना चाहिए। कभी कभी बोलते वक़्त सही बात भी बुरी लग जााती है क्योंकि बोलने की टोनिंग गलत हो जाती हैै। सामनेवाला व्यक्ति क्या केेहने की कोशीश कर रहा है, समझने में कोई गलती तो नही हो रही यह सब हमारे बोलने के लहजे में दिखनी चाहिए।

परिस्थितियों का सही आकलन करना हमारी वाणी को अच्छा बना सकता है , कौनसी परिस्थिति में हमे कैसे बोलना चाहिए  विशेष रूप से रिश्तों के उतार चढ़ाव में जब वे नाजुुक वक़्त से गुजरते है। यह बहुुुत जरूरी है कि हम अपनी वाणी से भी सबकुछ सरल बनाने का प्रयास करते रहे।

उचित मार्गदर्शन का सहारा ले। अगर आपमे बोलने की कला निपुण नही है तो आजकल बहुत सारी डिजिटल चीजे मार्केट में अवेलेबल है जो आसानी से आपको कम्यू्ननिकेशन स्कील का अच्छा माार्गदर्शन देगी। साथ ही ट्रेनिंग सेेंटर भी है जो इस प्रकार का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार रहते है।।

बोलते वक़्त खुद पर नियंत्रण रखें। अकसर गुस्से में या आवेेेश में आकर हम अपने आप पर से नियंत्रण खो देते है जिससे मामला और  भी पेेेचीदा हो सकता है ।अपने आप पर नियंत्रन रखने से निशचित ही आपकी वाणी अच्छी बन जाायगी।

        जीवन के किताब के पन्नों से.....................

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