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शनिवार, 27 जून 2020

नेल्सन मंडेला का संक्षिप्त जीवन - अफ्रीकन गाँधी

एक गांधीवादी विचारक जो 27 साल के लम्बी कारावास में कठोर जीवन बिताने के बाद दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति बना और दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रहे रंगभेद को समाप्त किया ।वे दक्षिण अफ्रीका एवं समूचे विश्व में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गये। 

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नेल्सन मंडेला और उनके जीवन:

मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को को पूर्वी केप में म्वेज़ो गाँव में मदीबा कबीले के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। इनका बचपन का नाम रोलिह्लाला मंडेला था। उनके पिता का नाम नाकोसी मुफ्फिसिस्वा गडेला मंडेला और माता का नाम नोनकापी नोसकेनी था। उनके पिता थेम्बू लोगों के अभिनय राजा के मुख्य सलाहकार थे। मंडेला का प्राथमिक शिक्षा क्युनु के एक मिशनरी स्कूल से शुरू  हुआ जहाँ उनके शिक्षक, मिस मिडिंगेन ने उन्हें सभी स्कूली बच्चों को "ईसाई" नाम देने के रिवाज़ के अनुसार नेल्सन नाम दिया। तब से उनका पूरा नाम नेल्सन रोलिह्लाला मंडेला हुआ। उन्होंने बिच-बिच में अपनी पढाई छोड़कर आन्दोलन में सक्रिय रहने लगे थे। 1943 में स्नातक की पढ़ाई के लिए फोर्ट हरे चले गए। इस बीच, उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटर्स्रैंड में एलएलबी के लिए अध्ययन शुरू किया। जब वे कॉलेज में पढ़ रहे थे तो उस कॉलेज का सबसे गरीब छात्र थे और 1952 में स्नातक किए बिना विश्वविद्यालय छोड़ दिया। जब उन्हें 1962 में कारावास का सजा हुआ तो जेल से हीं  लंदन विश्वविद्यालय के माध्यम से फिर से अध्ययन शुरू किया,लेकिन उस डिग्री को भी पूरा नहीं किया। मंडेला का डिग्री का सपना जब पूरा हुआ 1989 में,जब वे अपने कारावास के अंतिम महीनों में थे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका विश्वविद्यालय के माध्यम से एलएलबी प्राप्त किया था।

नेल्सन मंडेला ने कुल तीन शादियाँ की थी उनके पहली पत्नी का नाम एवलिन नटोको मेस, दुसरे पत्नी  विनी मदिकिज़ेला और तीसरे पत्नी ग्राशा मैचल. नेल्सन मंडेला  की मृत्यु 95 वर्ष के उम्र में 5 दिसम्बर 2013 को ह्यूटन, जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ़्रीका में हुआ था।

 

 व्यक्तिगत और राजनीती सफर:

नेल्सन मंडेला का राजनीती सफ़र कॉलेज के दिनों से ही शुरू हो गया था उन्हें एक छात्र के विरोध में शामिल होने के लिए कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था। जब वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ फोर्ट हरे में बैचलर ऑफ़ आर्ट्स की डिग्री के लिए पढ़ाई करने गए थे। नेल्सन मंडेला व्यक्तित्व के बहुत ही धनी थे और बचपन से ही गोरा और काला रंगभेद को देखते हुए बड़े हो रहे थे। कॉलेज से निष्कासन के बाद 1941 में  जोहान्सबर्ग भाग गए। वहां उन्होंने एक खदान सुरक्षा अधिकारी के रूप में काम किया और धीरे- धीरे रंग भेद के विरोध में खड़े होने लगे और राजनीती में भी दिलचस्पी बढ़ाने लगे। इसी दौरान इनकी मुलाकात वॉल्टर सिसुलू और वॉल्टर एल्बरटाइन से हुई। उन दोनों के व्यक्तिव से मंडेला काफी प्रभावित हुए। रंग के आधार पर होने वाले भेदभाव को दूर करने के उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1944 में वे अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गये जिसने रंगभेद के विरूद्ध आन्दोलन चला रखा था। इसी वर्ष उन्होंने अपने मित्रों और सहयोगियों के साथ मिल कर अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की। 1947 में वे लीग के सचिव चुने गये। साथ ही मंडेला के वकालत की पढ़ाई चल रहा था और उन दोनों ने मिलकर रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाई। 5 अगस्त 1962 को उन्हें मजदूरों को हड़ताल के लिए उकसाने और बिना अनुमति देश छोड़ने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। 

उन पर मुकदमा चलाया गया और 1964 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. 1964 से 1990 तक रंगभेद और अन्याय के खिलाफ लड़ाई के चलते उन्हें जेल में जीवन के 27 साल बिताने पड़े. उन्हें रॉबेन द्वीप के कारागार में रखा गया था जहां उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था. इस दौरान उन्होंने गुप्त रूप से अपनी जीवनी लिखी। जेल में लिखी गई उनकी जीवनी 1994 में एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुई जिसका नाम 'लॉन्ग वॉक टू फ्रीडम' है। 

 

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विचारधारा और योगदान: 

अफ्रीका के 'गांधी' कहे जाने वाले नेल्‍सन मंडेला को शांति के दूत के रूप में जाने जाते हैं। वे महात्मा गाँधी के विचारों से प्रभावित होकर और अहिंसा के रास्ते पे चलकर रंग भेद के खिलाफ लड़ाई में नेल्‍सन मंडेला के योगदान को कोई भुला नहीं सकता। जेल में कठोर कारावास के बाद भी अपना लड़ाई जारी रखा और आखिरकार 11 फ़रवरी 1990 को उनकी रिहाई हुई। रिहाई के बाद तत्कालीन श्वेत सरकार के साथ एक समझौता का प्रारूप तैयार हुआ और शान्ति की नीति पर चलकर उन्होंने एक लोकतान्त्रिक एवं बहुजातीय अफ्रीका की नींव रखी।1994 में दक्षिण अफ़्रीका में रंगभेद रहित चुनाव हुए। अफ़्रीकन नेशनल कांग्रेस ने 62 प्रतिशत मत प्राप्त किये और बहुमत के साथ उसकी सरकार बनी।10 मई 1994 को मंडेला अपने देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। जिस प्रकार भारत में महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता कहते है उसी तरह  दक्षिण अफ्रीका के लोग मंडेला को भी "राष्ट्रपिता" मानते हैं क्योंकी उन्होंने दक्षिण अफ्रीका का "लोकतन्त्र के प्रथम संस्थापक हैं। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रंगभेद विरोधी संघर्ष के मंडेला के योगदान को देखते हुए नवम्बर 2009 में, उनके जन्मदिन,18 जुलाई को 'मंडेला दिवस' घोषित किया। और तब से पूरा विश्व नेल्सन मंडेला अन्तराष्ट्रीय दिवस के रूप में मानते हैं। 

नेल्सन मंडेला के जीवन संघर्ष के योगदान को देखते हुए कई विश्व प्रसिध्द पुरस्कार और सम्मान मिला जिसमे से प्रमुख है- नोबेल शांति पुरस्कार (1993), प्रेसीडेंट मैडल ऑफ़ फ़्रीडम ऑर्डर ऑफ़ लेनिन,भारत रत्न, निशान-ए–पाकिस्तान, गाँधी शांति पुरस्कार इत्यादि। 

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