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मंगलवार, 16 जून 2020

आयुर्वेद तरीके से वजन कम करने के 4 बेहतरीन उपाय: 4 Best Ways to Lose Weight in Ayurveda In Hindi

असमय खानपान और फ़ास्ट फ़ूड के वजह से मोटापा एक समस्या बनते जा रहा है उसमे पेट बढ़ना सबसे ज्यादा है।मोटापा सिर्फ खानपान के वजह से नहीं होता चिंता और तनाव भी एक कारण है।इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च(आईसीएमआर) के एक  सर्वेक्षण के मुताबिक,दिल्ली का लगभग हर चौथा बच्चा मोटापे का शिकार है।मोटापे से तरह-तरह के बीमारी का जन्म होता है जैसे हाई ब्लड प्रेशर,कोलेस्ट्राल और श्वास रोग की समस्या,हड्डियों और जोड़ों में परेशानी का खतरा,मधुमेह,हृदय रोग और कैंसर का जोखिम आइये जानते हैं आयुर्वेद तरीके से वजन कम करने के 4 बेहतरीन उपाय।

 आयुर्वेद तरीके से वजन कम करने के 4 बेहतरीन उपाय


1.रोज सुबह उठकर हल्का फुल्का व्यायाम करना:

भारत में व्यायाम करना और सैर करना बुजुर्ग लोगों की श्रेणी में रखा गया है,बच्चा,जवान या बुजुर्ग सभी को रोज सुबह उठकर हल्का फुल्का व्यायाम करना चाहिए।आयुर्वेद में कहा गया है की व्यायाम करने से हमारा शरीर शुद्ध होता है जैसे शास्त्रों में लिखा गया है स्नान करने से शरीर सुद्ध होता है व्यायाम हमारे शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है और यह हृदय रोग, रक्तवाहिका रोग,मधुमेह और मोटापा जैसे समृद्धि के रोगों को रोकने में मदद करता है। यह मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है और तनाव को रोकने में मदद करता है।जिससे शरीर का वजन संतुलित रहता है।प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम करने से मनुष्य के जीवन में अत्यधिक उल्लास,निरोगी,खुश तथा सुखी होता है।प्रतिदिन व्यायाम करने वाला व्यक्ति हमेशा हँसमुख,आत्मविश्वासी,उत्साही तथा शांत मन भाव वाला होता है। 


असमय खानपान और फ़ास्ट फ़ूड के वजह से मोटापा एक समस्या बनते जा रहा है उसमे पेट बढ़ना सबसे ज्यादा है।मोटापा सिर्फ खानपान के वजह से नहीं होता चिंता और तनाव भी एक कारण है  ।इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एक  सर्वेक्षण के मुताबिक,दिल्ली का लगभग हर चौथा बच्चा मोटापे का शिकार है।मोटापे से तरह-तरह के बीमारी का जन्म होता है जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल और श्वास रोग की समस्या,हड्डियों और जोड़ों में परेशानी का खतरा,मधुमेह,हृदय रोग और कैंसर का जोखिम आइये जानते हैं आयुर्वेद तरीके से वजन कम करने के 4 बेहतरीन उपाय।


2.खाना को पीकर और पानी को चबाकर खाएं:

ये सुनने में अजीब लगता होगा लेकिन यह सच है की खाना को मूंह में रखकर दांतों से इतना चबाओ की जबतक तरल पदार्थ में तब्दील ना हो जाये तबतक गले से निचे मत उतारो और उसी तरह पानी को चबाकर का अर्थ है घूंट-घूंट पीना आयुर्वेद में कहा गया है कि जो व्यक्ति खाना को अच्छी तरह से चबाकर और पानी को घूंट-घूंट पिएगा कभी भी डॉक्टर के पास नहीं जायेगा आयुर्वेद के इस पंक्ति से समझे “घूँट घूँट पानी पियो,रह तनाव से दूर,एसिडिटी या मोटापा,होवे चकना चूर,अर्थराइतिस या हर्निया,अपेन्डिस्क का त्रास,पानी पीजै बैठकर,कभी न आवे पास,सारे रोग का कारण सिर्फ खाना और पानी है खाना खाने के लगभग एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और अगर रात का खाना खाते हैं तो खाने के बाद टहलना चाहिए अगर इस नियम को अनुसरण किया तो कभी वजन नहीं बढेगा।  
3.रात का खाना जल्दी खाएं:

अगर संभव हो तो रत का खाना 6 से 7 बजे के बिच में खा लेना चाहिए ऐसे तो रात का खाना नहीं खाए तो सही है।रात के भोजन में 70% कच्चा पदार्थ को भोजन में शामिल करें जैसे फ्रूट सलाद, फल,सलाद और पकी हुई भोजन में दूध,ओट जैसे हल्का फुल्का चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए इससे आप सुबह उठने में आलस्य नहीं होगा और हल्का महसूस करेंगे।  
रात को दही नहीं खाना चाहिए रात को दही खाने से वजन बढ़ता है और आयुर्वेद के अनुसार दही कोप दोष को बढ़ाती है।क्योंकि दही में खट्टा और मीठा दोनों ही होते हैं। यह एक असंतुलन पैदा करती है जो नाक बंद करने जैसी परेशानी को बढ़ा सकती है और रात के समय नींद को प्रभावित कर सकती है। 


असमय खानपान और फ़ास्ट फ़ूड के वजह से मोटापा एक समस्या बनते जा रहा है उसमे पेट बढ़ना सबसे ज्यादा है।मोटापा सिर्फ खानपान के वजह से नहीं होता चिंता और तनाव भी एक कारण है  ।इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एक  सर्वेक्षण के मुताबिक,दिल्ली का लगभग हर चौथा बच्चा मोटापे का शिकार है।मोटापे से तरह-तरह के बीमारी का जन्म होता है जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल और श्वास रोग की समस्या,हड्डियों और जोड़ों में परेशानी का खतरा,मधुमेह,हृदय रोग और कैंसर का जोखिम आइये जानते हैं आयुर्वेद तरीके से वजन कम करने के 4 बेहतरीन उपाय।

4.भोजन का संतुलन बराबर हो: 

ऐसे तो आयुर्वेद में छह स्वादों का वर्णण है जैसे मीठा,खट्टा,नमकीन, तीखा,कड़वा और कसैला।अपने दैनिक आहार में सभी छह स्वादों को शामिल करना चाहिए जिससे शरीर का वजन संतुलन में रहता है।ऐसे अभी कुछ आयुर्वेद योगा गुरु बताते है की नमक चीनी नहीं खाना चाहिए ये तो ठीक है लेकिन चीनी के जगह गुड़ और नमक के जगह सेंधा नमक का भी प्रयोग भोजन में कर सकते हैं खाद्य पदार्थ जो कड़वे होते हैं।  जैसे पत्तेदार साग;तीखा,जैसे कि मसालेदार मिर्च मिर्च;और कसैले, जैसे कि अनार के बीज,मीठे,खट्टे,और नमकीन स्वादों के निर्माण की प्रकृति के लिए स्वस्थ प्रतिरूप प्रदान करते हैं।आयुर्वेद में भोजन को हरेक दिन बदल कर खाना चाहिए और मौसम के अनुसार साग-सब्जी और फल का चुनाव करना चाहिए। 
         जीवन के किताब के पन्नों से ......

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